Wednesday, June 01, 2011

नफरत

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तकसीन  -  satisfaction/ peace
सानिध्य  -  to-be-together
तस्सवुर  -  imagination
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प्यार में नफरत,  खिलाफत है,  रूहानी  है
उसकी आजमाइश तो, एक नयी  कहानी है..
दूंढता  हूँ  जिसको,  मैं  हर  बार  खोकर..
उसकी नफरत तो,   बेपरवाह  नादानी है.  

हर बार जो दूर जाता  है, तकसीन इरादों से
उसकी ये जिद तो, बस अब आजमानी है

एक उम्र गुजरती है, जिसको इस कदर  पाने में
उसकी ये  अकड़ ,  तो  शायद हरकते  बचकानी है.

एक तस्सवुर सा  पाया था,  जिसमे एक बार  मैंने,
वही अमन  और  सानिध्य, क्या मिलना आसानी है ?. 

तू न भी लौटे तो , बस यही  सकून  रहेगा , सिर्फ  बाकी
कि तेरे खयालों में , ये बहते आंसू, दर्द  नहीं, सिर्फ पानी है.
  
  


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