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At some point in our lives, we are all faced with a crossroad of some type or another, when we really have to make a choice for good or bad.
What really give us the headway, are the people we really love and trust. But at times confusion sinks in and that mindset is hard to comprehend.
These inevitable turning points present positive opportunities to live life anew and recreate our lives. Our shared personal experiences, sage advice, and gentle guidance offer us the hope and faith we need in order to face our crossroads and soulfully traverse the roads of our lives.
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निस्तब्ध - quiet
एहतराम - respect / honour
हुजूम - crowd
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जिस मोड़ पे आकर, मैं हूँ इस कदर निस्तब्ध
हुजूम - crowd
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जिस मोड़ पे आकर, मैं हूँ इस कदर निस्तब्ध
यहाँ से राह मेरी अब , और कैसे कोई समझेगा.
राह जहाँ भी जाती हो, उसका नहीं है एहतराम.
राह दिखाने वाला मेरा अब, और कोई कैसे बनेगा.
मैंने अब तक नहीं बदली राह, तेरी आवाज सुनकर
मेरी आवाज अब यहाँ, तेरे सिवा और कौन सुनेगा .
मेरी आवाज अब यहाँ, तेरे सिवा और कौन सुनेगा .
भीड़ में छोड़ कर जिनको, मैं कर रहा था ये सफ़र
अब इस सफ़र मे हमसफ़र, तेरे सिवा और कोई कैसे बनेगा.
मेरे रास्ते वक़्त के साथ हो गए हैं , इस कदर संगीन
मेरी जिन्दादिली का रहनुमा अब, कौन,क्यों और कैसे बनेगा.
मैं इस crossroad पर हूँ, खड़ा हूँ आँखें बंद करके
मेरे सफ़र का मसीहा अब, बस सिर्फ तू और तू ही बनेगा.
इस वीराने में , तेरे भरोसे के सिवा कोई हुजूम नहीं दिखता
तुझे मंजूर हो या नामंजूर , तेरा भरोसा ही मेरी तकदीर बनेगा.
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