Tuesday, May 03, 2011

बिखरी यादें .. गुजरे दिन.

जिनके पास था .. मेरी हर खुशी का सामान ..
अहले वक़्त के साथ ..चकनाचूर कैसे हो गया ..
जो हमेशा करता था , मेर हर दिन को रंगीन..
वो आज मेरे जहाँ से, एकदम कैसे खो गया
तुम्हारा न मिलना, था कुदरत का मंजर ..
तुम्हारे बिना मैं , इतना नकारा कैसे हो गया. APRIL 21 ST , 2011.


हर बीती  शाम .. हर  बीता पल
मुझे दूर कर देता है ..सिर्फ  उनकी कुछ यादों  से ..
हर कतरे में लिखा प्यार , हर नजर में ऐतबार
मुझे पास लाता  है, सिर्फ उनकी इंतहा  यादों के  .
मौसमों की आवाजाई , अब बर्दाश्त नहीं होती  
हर सर्द  हवा  अब दूर ले जाती है , सिर्फ उनके वादों से . 


Tuesday, April 12, 2011 7:41 PM

तेरे लिखे सभी ख़त, कभी मिटा भी न पाया ..
तेरे दिए हुए कई जख्म, कभी भुला भी न पाया ..
जो आशियाने बनाये तेरी यादों से पहले
उनके कर्ज आज तलक चुका भी न पाया..
तेरे खतों ने बनाया मुझे emotional bankrupt
तमाम खतों को आजतक पूरा, कभी पढ़ भी न पाया. April12, 2011

Thursday, March 31, 2011 8:12 PM

किये कैद ,हमने वो लम्हे अशिकी  के..वस्ल के  
ही  लिखे हमने अफ़साने  आशिकी  के अब तलक
जवान तुम भी थे  ..लाखों में एक हसींन  तुम  भी  थे  
वजह सिर्फ ये  थी ..मेंने जो देखा  देख पाए  कोई 
मैं जितना तुम्हे  चाहूँ  , नहीं चाहे और  कोई
आज तुमसे जुदा , वही मंजर  बार बार  देखता  हूँ
वही नज़ारे लेकिन सिर्फ ख़्वाबों में  देखता हूँ.
आज भी नहीं हैं , तेरी तस्वीर इन  हाथों में
मगर दिले   जिगर   में सिर्फ  तेरा ही चेहरा देखता हूँ. .
 मार्च 31st
२०११, ८.०० pm   
     
हर कतरे पे   लिखा था जिसका नाम ..
वो आज भी  कलेजे में सिहरन  पैदा करता है
हमारे हर आंसू  में था  जिसका दर्द  ..
वो आज भी हमारी खिलखिलाहटों में दिखता  है
वक़्त के फेरबदल ने , हमें तुमसे न मिलाया..
तुम्हारा इंतज़ार आज भी हमारी आँखों में दिखता है..
हमें  मालूम है तुम्हारा आना है नामुमकिन ..
तुम्हारा एक बार अचानक आना तो कम से कम  दिखता है..
      
 Saturday, April 02, 2011 9:11 PM
On cricket world cup victory -


यह जो लम्हे मिले आज .. कुछ अजीब सी कशमकश है..
हजारों राहों की ..एक जानी पहचानी सी  मंजिल है
आगे भी वक़्त में .. ऐसी ही लम्हे आते  रहें 
मैंने आज खुद  को पहचाना..यह सब तेरी ही जद्धौजहद है.  
तुने आज मंजिल पा के ..मुझे मुझसे मिला दिया 
मेरी अपनी जमीं  को , उसका  खोया हुआ दर्जा दिला दिया. 

Monday, March 07, 2011 11:45 AM


हर वक़्त हमने माँगा था , एक लम्हा जिनसे,
वो इस कदर तमाम उम्र, मूतमइन ही रहे..
आज इसे झांसा समझो या बदनसीबी..
आज उनपे लम्हा है पर, हमपे जिगर ही नहीं..

 Monday, March 07, 2011 11:45 AM

मोहब्बत में इतने , सितम थे क्यों इतने
तुम्हे खो  के देखा , सितमगर थे अच्छे ..
अगर भरी  धूप  में , तुमको  निहारा  होता ..
तुम्हे छुप के देखा , कभी सहारा होता .
वो सावन के गाने , cool  केसरिया दुप्पटा  ..
बिन बादल के , तुम्हारा हम पे बरसना .
हमें कोई ले के जाए , उस वक्ते जहां में 
तुम्हारा तिलमिलाना  और भयावह  ज़माना 
हमें यारलौटा दे , वो जवानी का परचम  
तुम्हारा total बदलना ,और   हमारा सिसखना.

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