Thursday, September 15, 2011

आदिल (just)





जान कर  तुझे अपना,  मैं  बेफ़िक्र  समन्दर में मिल गया
मुझे मौजों ने डूबा   दिया, तुझे  किनारा मिल गया .   

तेरी बातों  से,  तेरी फितरत  का  कभी  पता ही न मिला
तुझे  दरकार थी  हमदर्द की ,  हमने हमसफ़र  समझ लिया.

न दूंगा दोष तुझको,  और तेरी उस तहरीरे नीयत को
मैं तो था अचेतन,  पर तुझे तो इस  दिल की खबर  होगी.

काश!  कभी बातों बातों  में,  तुमने  हाले दिल बयां किया होता
कि इस बेवफा  समन्दर में,  हर एक गिरा आंसू  मोती नहीं होता.    

हर एक गुजरा  पल, शाने  चराग और आदिल  नहीं होता
और डूबते हुए प्यार को कभी, तिनके का सहारा नहीं होता.

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